Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.8.6-7: सुयज्ञ, वामदेव, जाबालि, कश्यप, पुरोहित वसिष्ठ तथा अन्य श्रेष्ठ ब्राह्मणों की पूजा करके धर्मात्मा राजा दशरथ ने धर्म और अर्थ से परिपूर्ण ये मधुर वचन कहे- 6-7॥ | ramayan सर्ग 1.8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुयज्ञं वामदेवं च जाबालिमथ काश्यपम्।
पुरोहितं वसिष्ठं च ये चाप्यन्ये द्विजोत्तमा:॥ ६॥
तान् पूजयित्वा धर्मात्मा राजा दशरथस्तदा।
इदं धर्मार्थसहितं श्लक्ष्णं वचनमब्रवीत्॥ ७॥
अनुवाद
सुयज्ञ, वामदेव, जाबालि, कश्यप, पुरोहित वसिष्ठ तथा अन्य श्रेष्ठ ब्राह्मणों की पूजा करके धर्मात्मा राजा दशरथ ने धर्म और अर्थ से परिपूर्ण ये मधुर वचन कहे- 6-7॥
After worshiping Suyagya, Vamdev, Jabali, Kashyap, the priest Vasistha and other great brahmins, the virtuous king Dashrath said these sweet words full of religion and meaning - 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥