श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.8.3-4 
स निश्चितां मतिं कृत्वा यष्टव्यमिति बुद्धिमान्।
मन्त्रिभि: सह धर्मात्मा सर्वैरपि कृतात्मभि:॥ ३॥
ततोऽब्रवीन्महातेजा: सुमन्त्रं मन्त्रिसत्तम।
शीघ्रमानय मे सर्वान् गुरूंस्तान् सपुरोहितान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अपने समस्त शुद्धचित्त मन्त्रियों के साथ परामर्श करके यज्ञ करने का निश्चय करके उस अत्यन्त तेजस्वी, बुद्धिमान् एवं धर्मात्मा राजा ने सुमन्त्र से कहा - 'मन्त्री! आप मेरे समस्त गुरुजनों और पुरोहितों को शीघ्र ही यहाँ ले आइये।'
 
Having decided to perform the Yagya in consultation with all his pure minded ministers, that very brilliant, intelligent and religious king said to Sumantra - 'Minister! You bring all my teachers and priests here immediately. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)