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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.8.24 
तासां तेनातिकान्तेन वचनेन सुवर्चसाम्।
मुखपद्मान्यशोभन्त पद्मानीव हिमात्यये॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस मनोहर वचन से उन सुन्दर और तेजस्वी रानियों के मुख वसन्त ऋतु में खिलने वाले कमल के फूलों के समान खिल उठे और अत्यन्त शोभायमान हो गए।
 
At that charming word, the faces of those beautiful and radiant queens blossomed like the lotus flowers that bloom in the spring season and became extremely beautiful. 24.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डेऽष्टम: सर्ग:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें आठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)