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श्लोक  1.8.2 
चिन्तयानस्य तस्यैवं बुद्धिरासीन्महात्मन:।
सुतार्थं वाजिमेधेन किमर्थं न यजाम्यहम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसकी चिंता करते-करते एक दिन महामनस्वी राजा के मन में यह विचार आया कि क्यों न मैं पुत्र प्राप्ति के लिए अश्वमेध यज्ञ करूं?
 
While worrying about him, one day the great-minded king got this idea in his mind that why should I not perform Ashwamedha Yajna to get a son?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)