Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.8.18-19h: जो यजमान विधिपूर्वक यज्ञ करता है, वह तत्काल नष्ट हो जाता है; अतः मैं आशा करता हूँ कि ऐसा यज्ञ विधिपूर्वक सम्पन्न हो सके। आप सभी लोग ऐसे साधन उपलब्ध कराने में समर्थ हैं। | ramayan सर्ग 1.8: राजा दशरथ का पुत्र के लिये अश्वमेधयज्ञ का प्रस्ताव और मन्त्रियों तथा ब्राह्मणों द्वारा उनका अनुमोदन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विधिहीनस्य यज्ञस्य सद्य: कर्ता विनश्यति।
तद्यथा विधिपूर्वं मे क्रतुरेष समाप्यते॥ १८॥
तथा विधानं क्रियतां समर्था: साधनेष्विति।
अनुवाद
जो यजमान विधिपूर्वक यज्ञ करता है, वह तत्काल नष्ट हो जाता है; अतः मैं आशा करता हूँ कि ऐसा यज्ञ विधिपूर्वक सम्पन्न हो सके। आप सभी लोग ऐसे साधन उपलब्ध कराने में समर्थ हैं।
'The Yajaman who performs an yajna without following the rules gets destroyed instantly; therefore, I hope that such a yajna can be completed in a proper manner. All of you are capable of providing such means.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥