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ramayan 1.77.20-21h: भरत के चले जाने के बाद भी पराक्रमी श्री राम और लक्ष्मण अपने देवतुल्य पिता की सेवा और पूजा में लगे रहे।   |   ramayan सर्ग 1.77: राजा दशरथ का पुत्रों और वधुओं के साथ अयोध्या में प्रवेश, सीता और श्रीराम का पारस्परिक प्रेम   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.77.20-21h 
गते च भरते रामो लक्ष्मणश्च महाबल:॥ २०॥
पितरं देवसंकाशं पूजयामासतुस्तदा।
 
 
अनुवाद
भरत के चले जाने के बाद भी पराक्रमी श्री राम और लक्ष्मण अपने देवतुल्य पिता की सेवा और पूजा में लगे रहे।
 
After Bharat left, the mighty Sri Rama and Lakshmana remained engaged in the service and worship of their god-like father. 20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)