श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.76.4 
इत्युक्त्वा राघव: क्रुद्धो भार्गवस्य वरायुधम्।
शरं च प्रतिजग्राह हस्ताल्लघुपराक्रम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर पराक्रमी श्री रामजी क्रोधित हो गए और उन्होंने परशुरामजी से वह उत्तम धनुष-बाण छीन लिया (और साथ ही उनकी वैष्णवी शक्ति भी उनसे वापस ले ली)।
 
Having said this, Sri Rama, the valiant one, became angry and took away from Parasurama that excellent bow and arrow (along with that he also took back his Vaishnavi power from him).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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