श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.76.24 
रामं दाशरथिं रामो जामदग्न्य: प्रपूजित:।
तत: प्रदक्षिणीकृत्य जगामात्मगतिं प्रभु:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद दशरथनन्दन श्रीराम ने जमदग्निकुमार परशुराम की पूजा की। उनके द्वारा पूजित होकर प्रभावशाली परशुराम दशरथकुमार श्री राम की परिक्रमा करके अपने स्थान पर चले गये। 24॥
 
Thereafter Dashrathanandan Shri Ram worshiped Jamdagnikumar Parashuram. Being worshiped by him, the influential Parashuram Dashrathkumar went to his place after circumambulating Shri Ram. 24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे षट्सप्ततितम: सर्ग:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें छिहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)