श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.76.21 
तथा ब्रुवति रामे तु जामदग्न्ये प्रतापवान्।
रामो दाशरथि: श्रीमांश्चिक्षेप शरमुत्तमम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जमदग्निपुत्र परशुरामजी की यह बात सुनकर महाबली दशरथ के पुत्र श्रीमान् रामचन्द्रजी ने वह उत्तम बाण छोड़ा।
 
Upon hearing Jamdagni's son Parashurama say this, the mighty Dasharathan's son Shriman Ramachandra released that excellent arrow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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