Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.76.19: 'ककुत्स्थकुलभूषण! आपके सामने मेरी जो विवशता प्रकट हुई है, वह मेरे लिए लज्जा का कारण नहीं हो सकती; क्योंकि आपने त्रिलोकीनाथ श्रीहरि ने मुझे परास्त कर दिया है॥19॥ | ramayan सर्ग 1.76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'ककुत्स्थकुलभूषण! आपके सामने मेरी जो विवशता प्रकट हुई है, वह मेरे लिए लज्जा का कारण नहीं हो सकती; क्योंकि आपने त्रिलोकीनाथ श्रीहरि ने मुझे परास्त कर दिया है॥19॥
'Kakutsthakulbhushan! The fact that my helplessness has been revealed in front of you cannot be a cause of shame for me; because you, Trilokinath Shri Hari, have defeated me.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥