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ramayan 1.76.16: "किन्तु हे राम! आप इस श्रेष्ठ बाण से उन अतुलनीय लोकों को नष्ट कर दीजिए, जिन्हें मैंने अपनी तपस्या से जीत लिया है; अब इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए।"   |   ramayan सर्ग 1.76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.76.16 
लोकास्त्वप्रतिमा राम निर्जितास्तपसा मया।
जहि ताञ्छरमुख्येन मा भूत् कालस्य पर्यय:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
"किन्तु हे राम! आप इस श्रेष्ठ बाण से उन अतुलनीय लोकों को नष्ट कर दीजिए, जिन्हें मैंने अपनी तपस्या से जीत लिया है; अब इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए।"
 
"But, O Rama! You should destroy with this best arrow the incomparable worlds which I have conquered by my austerities; there should be no delay in doing so now."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)