श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.76.15 
तामिमां मद‍्गतिं वीर हन्तुं नार्हसि राघव।
मनोजवं गमिष्यामि महेन्द्रं पर्वतोत्तमम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अतः हे वीर राघव! आप मेरी गतिशक्ति को नष्ट न करें। मैं मन के वेग से तुरंत ही महेन्द्र नामक महान पर्वत पर जाऊँगा॥15॥
 
‘Therefore, brave Raghava! Please do not destroy my power of movement. I will immediately go to the great mountain named Mahendra with the speed of the mind.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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