श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.76.13 
काश्यपाय मया दत्ता यदा पूर्वं वसुंधरा।
विषये मे न वस्तव्यमिति मां काश्यपोऽब्रवीत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! पूर्वकाल में जब मैंने यह पृथ्वी कश्यप जी को दान में दी थी, तब उन्होंने मुझसे कहा था कि 'तुम्हें मेरे राज्य में नहीं रहना चाहिए'॥13॥
 
'Raghunandan! In the past when I had donated this earth to Kashyap ji, he had told me that 'You should not live in my kingdom'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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