श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.76.12 
तेजोभिर्गतवीर्यत्वाज्जामदग्न्यो जडीकृत:।
रामं कमलपत्राक्षं मन्दं मन्दमुवाच ह॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वीर्य नष्ट हो जाने के कारण वीर्यहीन हो जाने के कारण जड़ हो चुके जमदग्निकुमार परशुराम ने कमलनयन श्री राम से धीरे से कहा- ॥12॥
 
Jamadagnikumar Parshuram, who had become inert due to becoming semenless due to the loss of semen, said slowly to lotus-eyed Shri Ram - ॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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