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ramayan 1.76.11: जब श्री राम ने उस महान धनुष को अपने हाथ में लिया, तो सभी लोग आश्चर्य से स्तब्ध हो गए। (परशुराम का वैष्णव तेज निकलकर श्री राम में विलीन हो गया।) नपुंसक हो चुके जमदग्निपुत्र राम ने दशरथपुत्र श्री राम की ओर देखा।   |   ramayan सर्ग 1.76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम का वैष्णव-धनुष को चढ़ाकर अमोघ बाण के द्वारा परशुराम के तपःप्राप्तपुण्य लोकों का नाश करना तथा परशुराम का महेन्द्र पर्वत को लौट जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.76.11 
जडीकृते तदा लोके रामे वरधनुर्धरे।
निर्वीर्यो जामदग्न्योऽसौ रामो राममुदैक्षत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब श्री राम ने उस महान धनुष को अपने हाथ में लिया, तो सभी लोग आश्चर्य से स्तब्ध हो गए। (परशुराम का वैष्णव तेज निकलकर श्री राम में विलीन हो गया।) नपुंसक हो चुके जमदग्निपुत्र राम ने दशरथपुत्र श्री राम की ओर देखा।
 
When Shri Ram took that great bow in his hands, everyone became stunned with surprise. (Parashuram's Vaishnav radiance came out and merged with Shri Ram.) Jamadagni's son Ram, who had become impotent, looked towards Dasharath's son Shri Ram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)