श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 74: राजा जनक का कन्याओं को भारी दहेज देकर राजा दशरथ आदि को विदा करना, मार्ग में शुभाशुभ शकुन और परशुरामजी का आगमन  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.74.8-9 
गच्छन्तं तु नरव्याघ्रं सर्षिसङ्घं सराघवम्॥ ८॥
घोरास्तु पक्षिणो वाचो व्याहरन्ति समन्तत:।
भौमाश्चैव मृगा: सर्वे गच्छन्ति स्म प्रदक्षिणम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस समय जब महाराज दशरथ ऋषियों की टोली और भगवान् राम के साथ भ्रमण कर रहे थे, तब उनके चारों ओर भयंकर शब्द करने वाले पक्षी कलरव करने लगे और भूमि पर विचरण करने वाले समस्त मृग उन्हें अपने दाहिने ओर रखते हुए आगे बढ़ने लगे ॥8-9॥
 
At that time, while Maharaja Dasharatha was travelling with the group of sages and Lord Rama, birds with fierce voices started chirping all around him and all the deer roaming on the land started moving ahead keeping him on their right side. ॥ 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)