Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.74.6-8h: इस प्रकार मिथिला के राजा जनक ने बड़े हर्ष के साथ उत्तम दहेज दिया। दहेज में नाना प्रकार की वस्तुएँ देकर वे राजा दशरथ की अनुमति लेकर मिथिला स्थित अपने महल में लौट आए। उधर, अयोध्या के राजा दशरथ भी अपने महापराक्रमी पुत्रों, सैनिकों और सेवकों के साथ, समस्त महामुनियों का नेतृत्व करते हुए अपनी राजधानी की ओर चल पड़े। | ramayan सर्ग 1.74: राजा जनक का कन्याओं को भारी दहेज देकर राजा दशरथ आदि को विदा करना, मार्ग में शुभाशुभ शकुन और परशुरामजी का आगमन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार मिथिला के राजा जनक ने बड़े हर्ष के साथ उत्तम दहेज दिया। दहेज में नाना प्रकार की वस्तुएँ देकर वे राजा दशरथ की अनुमति लेकर मिथिला स्थित अपने महल में लौट आए। उधर, अयोध्या के राजा दशरथ भी अपने महापराक्रमी पुत्रों, सैनिकों और सेवकों के साथ, समस्त महामुनियों का नेतृत्व करते हुए अपनी राजधानी की ओर चल पड़े।
In this way, King Janaka of Mithila gave the best dowry with great joy. After giving various types of things in dowry, he took the permission of King Dasharath and returned to his palace in Mithila. On the other hand, King Dasharath of Ayodhya also proceeded towards his capital with his great sons, soldiers and servants, leading all the great sages. 6-7 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥