श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 74: राजा जनक का कन्याओं को भारी दहेज देकर राजा दशरथ आदि को विदा करना, मार्ग में शुभाशुभ शकुन और परशुरामजी का आगमन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.74.24 
प्रतिगृह्य तु तां पूजामृषिदत्तां प्रतापवान्।
रामं दाशरथिं रामो जामदग्नॺोऽभ्यभाषत॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों द्वारा की गई पूजा को स्वीकार करके पराक्रमी जमदग्निपुत्र परशुराम ने दशरथपुत्र श्रीराम से इस प्रकार कहा।
 
Accepting the worship offered by the sages, the mighty Jamadagni's son Parashurama spoke thus to Dasharatha's son Sri Rama. 24.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे चतु:सप्ततितम: सर्ग:॥ ७४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें चौहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)