श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 74: राजा जनक का कन्याओं को भारी दहेज देकर राजा दशरथ आदि को विदा करना, मार्ग में शुभाशुभ शकुन और परशुरामजी का आगमन  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  1.74.15-16 
वसिष्ठ ऋषयश्चान्ये राजा च ससुतस्तदा॥ १५॥
ससंज्ञा इव तत्रासन् सर्वमन्यद्विचेतनम्।
तस्मिंस्तमसि घोरे तु भस्मच्छन्नेव सा चमू:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस समय केवल वसिष्ठ ऋषि, अन्य ऋषिगण तथा पुत्रों सहित राजा दशरथ ही सचेत थे, अन्य सब लोग अचेत हो गए थे। उस घोर अंधकार में राजा की सेना धूल से ढक गई थी॥15-16॥
 
At that time only sage Vasishtha, other sages and King Dasharath along with his sons were conscious, all others had become unconscious. In that intense darkness the king's army was covered in dust.॥ 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)