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ramayan 1.73.5-6h: परंतु हे पृथ्वीनाथ! अयोध्या में जब मैंने सुना कि आपके सभी पुत्र विवाह के लिए आपके साथ मिथिला में आए हैं, तब मैं तुरन्त यहाँ आया; क्योंकि मुझे अपनी बहन के पुत्र को देखने की बड़ी इच्छा थी।॥5 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  1.73.5-6h 
श्रुत्वा त्वहमयोध्यायां विवाहार्थं तवात्मजान्।
मिथिलामुपयातांस्तु त्वया सह महीपते॥ ५॥
त्वरयाभ्युपयातोऽहं द्रष्टुकाम: स्वसु: सुतम्।
 
 
अनुवाद
परंतु हे पृथ्वीनाथ! अयोध्या में जब मैंने सुना कि आपके सभी पुत्र विवाह के लिए आपके साथ मिथिला में आए हैं, तब मैं तुरन्त यहाँ आया; क्योंकि मुझे अपनी बहन के पुत्र को देखने की बड़ी इच्छा थी।॥5 1/2॥
 
‘But O Prithvinath! On hearing in Ayodhya that all your sons have come with you to Mithila for marriage, I immediately came here; because I had a great desire to see my sister's son.' ॥ 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)