श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.73.3-4 
केकयाधिपती राजा स्नेहात् कुशलमब्रवीत्।
येषां कुशलकामोऽसि तेषां सम्प्रत्यनामयम्॥ ३॥
स्वस्रीयं मम राजेन्द्र द्रष्टुकामो महीपति:।
तदर्थमुपयातोऽहमयोध्यां रघुनन्दन॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! केकय देश के राजा ने बड़े प्रेम से आपका कुशलक्षेम पूछा है और हमारे देश के वे सभी लोग, जिनका कुशलक्षेम आप जानना चाहते हैं, इस समय स्वस्थ एवं प्रसन्न हैं। राजेन्द्र! केकय देश के राजा मेरे भतीजे भरत से मिलना चाहते हैं। अतः मैं उन्हें लाने के लिए अयोध्या आया हूँ।'
 
'Raghunandan! The King of Kekaya country has asked about your well-being with great affection and all the people of our country whose well-being you would like to know, are healthy and happy at this time. Rajendra! The King of Kekaya wants to see my nephew Bharat. Therefore, I came to Ayodhya to bring him.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas