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ramayan 1.73.29-31h: देवताओं के नगाड़े बजने लगे और आकाश से फूलों की भारी वर्षा होने लगी। इस प्रकार मन्त्रों और संकल्पों के जल से अपनी पुत्री सीता का दान करके, राजा जनक ने हर्षित होकर लक्ष्मण से कहा - 'लक्ष्मण! तुम्हारा कल्याण हो। आओ, मैं तुम्हें उर्मिला दे रहा हूँ। उसे स्वीकार करो। उसका हाथ अपने हाथ में ले लो। इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए।'॥29-30 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 73: श्रीराम आदि चारों भाइयों का विवाह  »  श्लोक 29-31h
 
 
श्लोक  1.73.29-31h 
देवदुन्दुभिनिर्घोष: पुष्पवर्षो महानभूत्।
एवं दत्त्वा सुतां सीतां मन्त्रोदकपुरस्कृताम्॥ २९॥
अब्रवीज्जनको राजा हर्षेणाभिपरिप्लुत:।
लक्ष्मणागच्छ भद्रं ते ऊर्मिलामुद्यतां मया॥ ३०॥
प्रतीच्छ पाणिं गृह्णीष्व मा भूत् कालस्य पर्यय:।
 
 
अनुवाद
देवताओं के नगाड़े बजने लगे और आकाश से फूलों की भारी वर्षा होने लगी। इस प्रकार मन्त्रों और संकल्पों के जल से अपनी पुत्री सीता का दान करके, राजा जनक ने हर्षित होकर लक्ष्मण से कहा - 'लक्ष्मण! तुम्हारा कल्याण हो। आओ, मैं तुम्हें उर्मिला दे रहा हूँ। उसे स्वीकार करो। उसका हाथ अपने हाथ में ले लो। इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए।'॥29-30 1/2॥
 
The drums of the gods started playing and there was a heavy rain of flowers from the sky. Having thus given away his daughter Sita with the water of mantras and resolutions, King Janaka, overjoyed, said to Lakshmana - 'Laxmana! May you be blessed. Come, I am giving Urmila to you. Accept her. Take her hand in yours. There should be no delay in this.'॥ 29-30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)