श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.72.9 
विश्वामित्रवच: श्रुत्वा वसिष्ठस्य मते तदा।
जनक: प्राञ्जलिर्वाक्यमुवाच मुनिपुंगवौ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठजी की सलाह के अनुसार विश्वामित्रजी के ये वचन सुनकर राजा जनक ने हाथ जोड़कर उन दोनों ऋषियों से कहा -॥9॥
 
On hearing these words of Viswamitra, taken in accordance with the advice of Vasishtha, King Janaka folded his hands and said to the two sages -॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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