Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.72.25: राजा दशरथ, गौदान का अनुष्ठान पूरा करने के बाद, अपने पुत्रों से घिरे हुए, जगत के रक्षकों से घिरे हुए बैठे थे और शांत एवं स्थिर प्रजापति ब्रह्मा के समान दिख रहे थे।   |   ramayan सर्ग 1.72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.72.25 
स सुतै: कृतगोदानैर्वृत: सन्नृपतिस्तदा।
लोकपालैरिवाभाति वृत: सौम्य: प्रजापति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ, गौदान का अनुष्ठान पूरा करने के बाद, अपने पुत्रों से घिरे हुए, जगत के रक्षकों से घिरे हुए बैठे थे और शांत एवं स्थिर प्रजापति ब्रह्मा के समान दिख रहे थे।
 
King Dasharatha, surrounded by his sons after completing the ritual of donating cows, was then sitting surrounded by the guardians of the world and looking like the calm and composed Prajapati Brahma. 25.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे द्विसप्ततितम: सर्ग:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें बहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)