श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.72.21 
स गत्वा निलयं राजा श्राद्धं कृत्वा विधानत:।
प्रभाते काल्यमुत्थाय चक्रे गोदानमुत्तमम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ ने (दोपहर के समय) शिविर में जाकर यथाविधि अभ्युदय श्राद्ध किया। तत्पश्चात (रात बीत जाने पर) प्रातःकाल उठकर राजा ने तुरन्त ही उत्तम गोदान किया। 21॥
 
King Dasharatha went to the camp (in the afternoon) and performed Abhyudaya Shraddha as per the rituals. After that (after the night passed), the king woke up in the morning and immediately performed the best act of Godan. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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