श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.72.20 
तमापृष्ट्वा नरपतिं राजा दशरथस्तदा।
मुनीन्द्रौ तौ पुरस्कृत्य जगामाशु महायशा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मिथिला नरेश की अनुमति से यशस्वी राजा दशरथ श्रेष्ठ ऋषियों विश्वामित्र और वशिष्ठ को साथ लेकर तत्काल अपने निवासस्थान को चले गए॥20॥
 
Thereafter, with the permission of the king of Mithila, the famous king Dashrath immediately went to his residence, leading Vishwamitra and Vashishtha, the best sages. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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