श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.72.2 
अचिन्त्यान्यप्रमेयाणि कुलानि नरपुंगव।
इक्ष्वाकूणां विदेहानां नैषां तुल्योऽस्ति कश्चन॥ २॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! इक्ष्वाकु और विदेह दोनों राजाओं के वंश अज्ञेय हैं। दोनों के प्रभाव की कोई सीमा नहीं है। इन दोनों की बराबरी करने वाला कोई दूसरा वंश नहीं है। 2॥
 
'Narshrestha! The lineages of both Ikshvaku and Videha kings are indecipherable. There is no limit to the influence of both. There is no other dynasty that can match these two. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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