श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.72.19 
स्वस्ति प्राप्नुहि भद्रं ते गमिष्याम: स्वमालयम्।
श्राद्धकर्माणि विधिवद्विधास्य इति चाब्रवीत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'आपका कल्याण हो, आपका कल्याण हो। अब हम अपने विश्रामस्थान पर जाएँगे। वहाँ मैं नान्दीमुख श्राद्ध का अनुष्ठान करूँगा।' राजा दशरथ ने भी यही कहा।
 
'May you be blessed, may you be blessed. Now we shall go to our resting place. There I shall perform the ritual of Naandimukh Shraddha.' King Dasharath also said this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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