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ramayan 1.72.17: विदेहराज जनक की यह बात सुनकर रघुवंश को आनन्द देने वाले राजा दशरथ प्रसन्न हुए और मिथिलाराज से इस प्रकार बोले -॥17॥   |   ramayan सर्ग 1.72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.72.17 
तथा ब्रुवति वैदेहे जनके रघुनन्दन:।
राजा दशरथो हृष्ट: प्रत्युवाच महीपतिम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
विदेहराज जनक की यह बात सुनकर रघुवंश को आनन्द देने वाले राजा दशरथ प्रसन्न हुए और मिथिलाराज से इस प्रकार बोले -॥17॥
 
On hearing this from King Janaka of Videha, King Dasaratha, who brings joy to the Raghuvanshah, became pleased and replied to the King of Mithila thus -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)