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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना
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श्लोक 14
श्लोक
1.72.14
एवमुक्त्वा वच: सौम्यं प्रत्युत्थाय कृताञ्जलि:।
उभौ मुनिवरौ राजा जनको वाक्यमब्रवीत्॥ १४॥
अनुवाद
ये कोमल (मनोरम) वचन कहकर राजा जनक खड़े हुए और हाथ जोड़कर उन दोनों मुनियों से बोले-॥14॥
Having spoken these gentle (charming) words, King Janaka stood up and with folded hands spoke to the two sages -॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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