Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.72.10: 'हे ऋषियों! मैं अपने इस कुल को धन्य मानता हूँ, जिसे आप दोनों ने इक्ष्वाकु कुल के योग्य माना है और स्वयं इसके साथ सम्बन्ध स्थापित करने का आदेश दे रहे हैं। | ramayan सर्ग 1.72: विश्वामित्र द्वारा भरत और शत्रुज के लिये कुशध्वज की कन्याओं का वरण,राजा दशरथ का अपने पुत्रों के मंगल के लिये नान्दीश्राद्ध एवं गोदान करना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'हे ऋषियों! मैं अपने इस कुल को धन्य मानता हूँ, जिसे आप दोनों ने इक्ष्वाकु कुल के योग्य माना है और स्वयं इसके साथ सम्बन्ध स्थापित करने का आदेश दे रहे हैं।
‘O sages! I consider this clan of mine blessed, which you both have considered worthy of the Ikshvaku clan and are yourself ordering to establish relations with it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥