Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.71.4: उनके मिथि नाम का एक पुत्र हुआ। मिथि के पुत्र का नाम जनक था। वे हमारे कुल के प्रथम जनक थे (हमारे कुल के प्रत्येक राजा को उनके नाम पर 'जनक' कहा जाता है)। जनक से उदावसुक का जन्म हुआ॥4॥ | ramayan सर्ग 1.71: राजा जनक का अपने कल का परिचय देते हुए श्रीराम और लक्ष्मण के लिये क्रमशः सीता और ऊर्मिला को देने की प्रतिज्ञा करना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य पुत्रो मिथिर्नाम जनको मिथिपुत्रक:।
प्रथमो जनको राजा जनकादप्युदावसु:॥ ४॥
अनुवाद
उनके मिथि नाम का एक पुत्र हुआ। मिथि के पुत्र का नाम जनक था। वे हमारे कुल के प्रथम जनक थे (हमारे कुल के प्रत्येक राजा को उनके नाम पर 'जनक' कहा जाता है)। जनक से उदावसुक का जन्म हुआ॥4॥
‘They had a son named Mithi. Mithi's son was named Janaka. He was the first Janaka in our clan (every king of our clan is called 'Janaka' after his name). Udavasuka was born from Janaka.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥