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ramayan 1.71.14: 'मेरे पिता ने मुझे ज्येष्ठ पुत्र बनाकर राज्य पर अभिषिक्त किया और कुशध्वज का सम्पूर्ण भार मुझे सौंपकर वन में चले गये।   |   ramayan सर्ग 1.71: राजा जनक का अपने कल का परिचय देते हुए श्रीराम और लक्ष्मण के लिये क्रमशः सीता और ऊर्मिला को देने की प्रतिज्ञा करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 71: राजा जनक का अपने कल का परिचय देते हुए श्रीराम और लक्ष्मण के लिये क्रमशः सीता और ऊर्मिला को देने की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.71.14 
मां तु ज्येष्ठं पिता राज्ये सोऽभिषिच्य पिता मम।
कुशध्वजं समावेश्य भारं मयि वनं गत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'मेरे पिता ने मुझे ज्येष्ठ पुत्र बनाकर राज्य पर अभिषिक्त किया और कुशध्वज का सम्पूर्ण भार मुझे सौंपकर वन में चले गये।
 
'My father anointed me the eldest son to the kingdom and handed over the entire burden of the Kushadhwaja to me and went into the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)