श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.70.8 
तद‍्वृत्तं नृपति: श्रुत्वा दूतश्रेष्ठैर्महाजवै:।
आज्ञया तु नरेन्द्रस्य आजगाम कुशध्वज:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन अत्यन्त तीव्रगामी एवं श्रेष्ठ दूतों से मिथिला का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनकर राजा कुशध्वज राजा जनक की आज्ञा से मिथिला में आये।
 
Having heard the entire story of Mithila from those extremely swift and excellent messengers, King Kushadhwaj came to Mithila as per the orders of King Janaka.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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