श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.70.7 
सांकाश्यां ते समागम्य ददृशुश्च कुशध्वजम्।
न्यवेदयन् यथावृत्तं जनकस्य च चिन्तितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सांकाश्याम पहुंचकर उन्होंने कुशध्वज से भेंट की तथा मिथिला का सच्चा समाचार तथा जनक का अभिप्राय प्रस्तुत किया।
 
Reaching Sankashyam he met Kushadhwaj and presented the true news of Mithila and the intention of Janaka.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas