श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.70.6 
शासनात् तु नरेन्द्रस्य प्रययु: शीघ्रवाजिभि:।
समानेतुं नरव्याघ्रं विष्णुमिन्द्राज्ञया यथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजा की आज्ञा से वे महान दूत तीव्रगामी घोड़ों पर सवार होकर सिंहपुरुष कुशध्वज को बुलाने के लिए चल पड़े, मानो इन्द्र की आज्ञा से उसके दूत भगवान विष्णु को बुलाने जा रहे हों।
 
By the king's order, those great messengers rode on fast horses and set out to call the lion-man Kushadhwaj, as if by Indra's order his messengers were going to call Lord Vishnu. 6.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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