श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.70.5 
एवमुक्ते तु वचने शतानन्दस्य संनिधौ।
आगता: केचिदव्यग्रा जनकस्तान् समादिशत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा के ऐसा कहने पर कुछ शान्त और संयमी पुरुष शतानंद के पास आये और राजा जनक ने उन्हें पूर्वोक्त आदेश सुनाया।
 
Upon the King speaking in this manner some calm and composed men came to Shatananda and King Janaka conveyed the aforesaid orders to them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)