श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.70.45 
रामलक्ष्मणयोरर्थे त्वत्सुते वरये नृप।
सदृशाभ्यां नरश्रेष्ठ सदृशे दातुमर्हसि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे नरश्रेष्ठ! हे नरदेव! मैं इस इक्ष्वाकु कुल में उत्पन्न श्री राम और लक्ष्मण के लिए आपकी दो पुत्रियों का वरण कर रहा हूँ। वे आपकी पुत्रियों के योग्य हैं और आपकी पुत्रियाँ उनके योग्य हैं। अतः आप उनका कन्यादान करें।॥ 45॥
 
‘O best of men! O lord of men! I am choosing your two daughters for Shri Ram and Lakshmana, born in this Ikshwaku clan. They are worthy of your daughters and your daughters are worthy of them. Therefore, you should give them your kanyadaan.’॥ 45॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे सप्ततितम: सर्ग:॥ ७०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७०॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas