श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.70.40 
कल्माषपादोऽप्यभवत् तस्माज्जातस्तु शङ्खण:।
सुदर्शन: शङ्खणस्य अग्निवर्ण: सुदर्शनात्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
'वे कल्माषपाद नाम से भी प्रसिद्ध थे । उनके शंखण नामक पुत्र उत्पन्न हुए । शंखण का पुत्र सुदर्शन और सुदर्शन का पुत्र अग्निवर्ण हुआ । 40॥
 
'He was also famous by the name Kalmashpad. A son named Shankhan was born to him. Shankhan's son was Sudarshan and Sudarshan's son was Agnivarna. 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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