श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.70.36 
च्यवनं च नमस्कृत्य राजपुत्री पतिव्रता।
पत्या विरहिता तस्मात् पुत्रं देवी व्यजायत॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वह विधवा राजकुमारी कालिन्दी बड़ी पतिव्रता थी। महर्षि च्यवन को प्रणाम करके देवी अपने आश्रम को लौट गई। फिर समय आने पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया॥36॥
 
‘That widowed princess Kalindi was very devoted to her husband. After paying her obeisance to Maharishi Chyavan, the goddess returned to her hermitage. Then when the time came, she gave birth to a son.॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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