श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  1.70.34-35 
स तामभ्यवदद् विप्र: पुत्रेप्सुं पुत्रजन्मनि।
तव कुक्षौ महाभागे सुपुत्र: सुमहाबल:॥ ३४॥
महावीर्यो महातेजा अचिरात् संजनिष्यति।
गरेण सहित: श्रीमान् मा शुच: कमलेक्षणे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
'उस समय ब्रह्मर्षि च्यवन ने पुत्र-इच्छा रखने वाली कालिंदी से पुत्र-जन्म के विषय में कहा - 'हे महाभाग्य! तुम्हारे गर्भ में एक महान पुत्र है, जो अत्यन्त बलवान, अत्यन्त तेजस्वी और परम पराक्रमी है। वह तेजस्वी बालक कुछ ही दिनों में विष के प्रभाव से उत्पन्न होगा। अतः कमललोचने! तुम अपने पुत्र के विषय में चिन्ता न करो।'
 
'At that time Brahmarishi Chyavan said to Kalindi, who was desirous of a son, about the birth of a son - 'O great one! There is a great son in your womb, very strong, very brilliant and very brave, that radiant child will be born in a few days with poison. So Kamallochane! Don't worry about your son.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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