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श्लोक 1.70.26  |
मान्धातुस्तु सुत: श्रीमान् सुसन्धिरुदपद्यत।
सुसन्धेरपि पुत्रौ द्वौ ध्रुवसन्धि: प्रसेनजित्॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| मांधाता के यहां सुसन्धि नामक तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ। सुसन्धि के भी दो पुत्र थे- ध्रुवसन्धि और प्रसेनजित। 26॥ |
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| 'A radiant son named Susandhi was born to Mandhata. Susandhi also had two sons – Dhruvasandhi and Prasenjit. 26॥ |
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