श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.70.24 
अनरण्यात् पृथुर्जज्ञे त्रिशङ्कुस्तु पृथोरपि।
त्रिशङ्कोरभवत् पुत्रो धुन्धुमारो महायशा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'अनरण्य से पृथु और पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ।' त्रिशंकु का पुत्र प्रसिद्ध धुन्धुमार था। 24॥
 
‘From Anaranya was born Prithu and from Prithu Trishanku was born. Trishanku's son was the famous Dhundhumar. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)