श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  1.70.19-20 
अव्यक्तप्रभवो ब्रह्मा शाश्वतो नित्य अव्यय:॥ १९॥
तस्मान्मरीचि: संजज्ञे मरीचे: कश्यप: सुत:।
विवस्वान् कश्यपाज्जज्ञे मनुर्वैवस्वत: स्मृत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्माजी की उत्पत्ति का कारण अव्यक्त है - वे स्वयंभू हैं। अनादि, नित्य और अविनाशी हैं। उनसे मृगतृष्णा उत्पन्न हुई। मरीचि के पुत्र कश्यप हैं, कश्यप से विवस्वान और विवस्वान से वैवस्वत मनु उत्पन्न हुए। 19-20॥
 
'The reason for Brahmaji's origin is unexpressed - he is Swayambhu. Are eternal, eternal and indestructible. A mirage originated from them. Marichi's son is Kashyap, Vivasvan was born from Kashyap and Vaivaswat Manu was born from Vivasvan. 19-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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