श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  1.70.17-18h 
विश्वामित्राभ्यनुज्ञात: सह सर्वैर्महर्षिभि:॥ १७॥
एष वक्ष्यति धर्मात्मा वसिष्ठो मे यथाक्रमम्।
 
 
अनुवाद
यदि विश्वामित्र सहित समस्त महर्षि आज्ञा दें, तो ये पुण्यात्मा वसिष्ठ ही सर्वप्रथम मेरे कुल की परम्परा का विस्तारपूर्वक परिचय देंगे। ॥17 1/2॥
 
"If Vishwamitra along with all the great sages permit, then this virtuous Vasishtha will be the first to introduce the tradition of my family in detail." ॥17 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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