श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 70: राजा जनक का अपने भाई कुशध्वज को सांकाश्या नगरी से बुलवाना,वसिष्ठजी का श्रीराम और लक्ष्मण के लिये सीता तथा ऊर्मिला को वरण करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  1.70.16-17h 
विदितं ते महाराज इक्ष्वाकुकुलदैवतम्॥ १६॥
वक्ता सर्वेषु कृत्येषु वसिष्ठो भगवानृषि:।
 
 
अनुवाद
महाराज! आप जानते ही होंगे कि इक्ष्वाकु कुल के देवता महर्षि वसिष्ठ हैं। हमारे समस्त कार्यों में ये वसिष्ठ ऋषि ही कर्तव्य का उपदेश देते हैं और उन्हीं की आज्ञा का पालन किया जाता है॥16 1/2॥
 
‘Maharaj! You must be knowing that the deity of the Ikshwaku clan is Maharishi Vasishtha. In all our works, it is this sage Vasishtha who preaches the duty and his orders are followed.॥ 16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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