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ramayan 1.7.24: उनके मंत्रीगण मंत्रणा को गुप्त रखने तथा राज्य के कल्याणार्थ कार्य करने में तत्पर थे। वे राजा के प्रति समर्पित, कार्यकुशल तथा पराक्रमी थे। जैसे सूर्य उदय होकर अपनी तेजस्विता से चमकता है, वैसे ही उन तेजस्वी मंत्रियों से घिरे हुए राजा दशरथ अत्यंत शोभायमान हो रहे थे॥24॥   |   ramayan सर्ग 1.7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.7.24 
तैर्मन्त्रिभिर्मन्त्रहिते निविष्टै-
र्वृतोऽनुरक्तै: कुशलै: समर्थै:।
स पार्थिवो दीप्तिमवाप युक्त-
स्तेजोमयैर्गोभिरिवोदितोऽर्क:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उनके मंत्रीगण मंत्रणा को गुप्त रखने तथा राज्य के कल्याणार्थ कार्य करने में तत्पर थे। वे राजा के प्रति समर्पित, कार्यकुशल तथा पराक्रमी थे। जैसे सूर्य उदय होकर अपनी तेजस्विता से चमकता है, वैसे ही उन तेजस्वी मंत्रियों से घिरे हुए राजा दशरथ अत्यंत शोभायमान हो रहे थे॥24॥
 
His ministers were engaged in keeping the advice secret and working for the welfare of the kingdom. They were devoted to the king, efficient and powerful. Just like the sun rises and shines with its radiant rays, King Dasharath looked very beautiful surrounded by those illustrious ministers.॥24॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे सप्तम: सर्ग:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सातवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)