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ramayan 1.7.22: वे तीनों लोकों में विख्यात थे। वे दानशील और सत्यवादी थे। पुरुषसिंह राजा दशरथ अयोध्या में रहकर इस पृथ्वी पर शासन करते थे। 22॥   |   ramayan सर्ग 1.7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.7.22 
विश्रुतस्त्रिषु लोकेषु वदान्य: सत्यसंगर:।
स तत्र पुरुषव्याघ्र: शशास पृथिवीमिमाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वे तीनों लोकों में विख्यात थे। वे दानशील और सत्यवादी थे। पुरुषसिंह राजा दशरथ अयोध्या में रहकर इस पृथ्वी पर शासन करते थे। 22॥
 
He was famous in all three worlds. He was generous and truthful. Purushasingha king Dashrath used to rule this earth by staying in Ayodhya. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)