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ramayan 1.7.19: वह राजसी विचार-विमर्श को गुप्त रखने में समर्थ था। वह सूक्ष्मतम विषयों पर विचार करने में कुशल था। नीतिशास्त्र में उसका विशेष ज्ञान था और वह सदैव प्रिय वचन बोलता था॥19॥   |   ramayan सर्ग 1.7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.7.19 
मन्त्रसंवरणे शक्ता: शक्ता: सूक्ष्मासु बुद्धिषु।
नीतिशास्त्रविशेषज्ञा: सततं प्रियवादिन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह राजसी विचार-विमर्श को गुप्त रखने में समर्थ था। वह सूक्ष्मतम विषयों पर विचार करने में कुशल था। नीतिशास्त्र में उसका विशेष ज्ञान था और वह सदैव प्रिय वचन बोलता था॥19॥
 
He had the power to keep the royal deliberations secret. He was skilled in thinking about minute matters. He had special knowledge in ethics and he always spoke pleasing words.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)