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ramayan 1.7.1-2: इक्ष्वाकुवंश के वीर महामना राजा दशरथ के आठ मंत्री थे, जो मन्त्रों के सार को जानने वाले, मन्त्रों के मर्म को जानने वाले, बाह्य भावों को देखकर ही हृदय के भावों को जानने वाले, तथा राजा के हित में सदैव तत्पर रहने वाले थे। वे सभी अत्यन्त यशस्वी थे। वे सभी शुद्ध आचरण और विचारों वाले थे तथा निरन्तर राजकार्य में तत्पर रहते थे।॥1-2॥   |   ramayan सर्ग 1.7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 7: राजमन्त्रियों के गुण और नीति का वर्णन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.7.1-2 
तस्यामात्या गुणैरासन्निक्ष्वाको: सुमहात्मन:।
मन्त्रज्ञाश्चेङ्गितज्ञाश्च नित्यं प्रियहिते रता:॥ १॥
अष्टौ बभूवुर्वीरस्य तस्यामात्या यशस्विन:।
शुचयश्चानुरक्ताश्च राजकृत्येषु नित्यश:॥ २॥
 
 
अनुवाद
इक्ष्वाकुवंश के वीर महामना राजा दशरथ के आठ मंत्री थे, जो मन्त्रों के सार को जानने वाले, मन्त्रों के मर्म को जानने वाले, बाह्य भावों को देखकर ही हृदय के भावों को जानने वाले, तथा राजा के हित में सदैव तत्पर रहने वाले थे। वे सभी अत्यन्त यशस्वी थे। वे सभी शुद्ध आचरण और विचारों वाले थे तथा निरन्तर राजकार्य में तत्पर रहते थे।॥1-2॥
 
The brave Mahamana King Dasharath of the Ikshwaku dynasty had eight ministers endowed with the qualities befitting a minister, who knew the essence of mantras and could understand the heart's intentions just by looking at the external gestures. They were always engaged in the king's well-being and were therefore very famous. All of them had pure conduct and thoughts and were constantly engaged in the royal work.॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)